श्रवण हस्तक्षेप (Aural Intervention)
परिचय
श्रवण हस्तक्षेप (Aural Intervention) से आशय उन संगठित प्रयासों से है जो श्रवण बाधित व्यक्तियों की श्रवण क्षमता, भाषण एवं भाषा विकास को सुधारने के लिए किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अवशिष्ट श्रवण शक्ति का अधिकतम उपयोग कराना है, जिसके लिए श्रवण यंत्र (Hearing Aids) और कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। साथ ही, व्यवस्थित श्रवण प्रशिक्षण एवं भाषण-भाषा चिकित्सा द्वारा बच्चों को सुनने, बोलने और समझने की क्षमता विकसित करने में सहायता दी जाती है। हाल के वर्षों में प्रारंभिक पहचान एवं शीघ्र हस्तक्षेप कार्यक्रमों ने श्रवण बाधित बच्चों के जीवन की दिशा बदल दी है। इस प्रकार, श्रवण हस्तक्षेप केवल चिकित्सीय प्रक्रिया न होकर एक विकासात्मक दृष्टिकोण है, जो संप्रेषण, सामाजिक सहभागिता और शैक्षणिक उपलब्धि को प्रोत्साहित करता है।
श्रवण हस्तक्षेप का महत्व
श्रवण हस्तक्षेप का महत्व इस तथ्य में निहित है कि श्रवण शक्ति बोलचाल की भाषा, साक्षरता और संज्ञानात्मक कौशल के विकास की नींव है। शोध यह सिद्ध करता है कि बिना हस्तक्षेप वाले श्रवण बाधित बच्चों में भाषा अर्जन, भाषण विकास और सामाजिक-भावनात्मक प्रगति में गंभीर विलंब होता है। परिणामस्वरूप, उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। श्रवण हस्तक्षेप निम्नलिखित रूप से लाभकारी होता है–
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संचार कौशल का विकास – बच्चों को बोली जाने वाली भाषा समझने और प्रयोग करने में सक्षम बनाता है।
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समावेशन में सहयोग – श्रवण बाधित बच्चों को सामान्य साथियों के साथ पढ़ने-लिखने का अवसर देता है।
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स्वतंत्रता को प्रोत्साहन – बच्चों को आत्मविश्वास के साथ दैनिक जीवन जीने योग्य बनाता है।
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सामाजिक अलगाव की रोकथाम – सामाजिक सहभागिता एवं भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के आरंभिक वर्षों में मस्तिष्क की श्रवण तंत्रिकाओं का तीव्र विकास होता है, इसलिए शीघ्र हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है। दो वर्ष की आयु से पूर्व हस्तक्षेप प्राप्त करने वाले बच्चों में भाषण और भाषा विकास उल्लेखनीय रूप से बेहतर पाया गया है।
श्रवण हस्तक्षेप के दृष्टिकोण
श्रवण हस्तक्षेप विभिन्न दृष्टिकोणों पर आधारित होता है, जिनमें प्रमुख हैं:
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श्रवण-मौखिक दृष्टिकोण (Auditory-Verbal Approach) – इसमें अवशिष्ट श्रवण का अधिकतम उपयोग कर बच्चों को केवल सुनकर बोलना सिखाया जाता है। इसमें दृश्य संकेतों जैसे होठों की पढ़ाई को कम महत्व दिया जाता है।
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श्रवण-ओरल दृष्टिकोण (Auditory-Oral Approach) – इसमें श्रवण प्रशिक्षण के साथ-साथ दृश्य संकेत जैसे होठों की पढ़ाई को भी अनुमति दी जाती है।
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टोटल कम्युनिकेशन (Total Communication) – इसमें भाषण, होठों की पढ़ाई, सांकेतिक भाषा और अन्य दृश्य साधनों का संयोजन किया जाता है।
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द्विभाषी-द्विसांस्कृतिक दृष्टिकोण (Bilingual-Bicultural Approach) – इसमें सांकेतिक भाषा को पहली भाषा और बोली/लिखित भाषा को दूसरी भाषा के रूप में सिखाया जाता है।
हर दृष्टिकोण का चयन बच्चे की श्रवण हानि की तीव्रता, पहचान की आयु, पारिवारिक प्राथमिकताओं और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर किया जाता है।
तकनीकें और रणनीतियाँ
श्रवण हस्तक्षेप में विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे:
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श्रवण प्रशिक्षण – ध्वनियों को पहचानने, भेद करने, नाम देने और अर्थ समझने की क्षमता विकसित करना।
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भाषण चिकित्सा – ध्वनियों के सही उच्चारण, स्वर नियंत्रण और वाक् स्पष्टता पर काम करना।
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भाषा प्रोत्साहन – बच्चे की बातों को दोहराना, विस्तार करना और शब्दावली को बढ़ाना।
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सहायक तकनीक का प्रयोग – श्रवण यंत्र, कॉक्लियर इम्प्लांट, एफ.एम. सिस्टम आदि का उपयोग।
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माता-पिता एवं परिवार की भागीदारी – अभिभावकों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक वातावरण में भाषा-समृद्ध अवसर उपलब्ध कराना।
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कक्षा सहयोग – कक्षा ध्वनिकी में सुधार, बैठने की उचित व्यवस्था और शिक्षण तकनीकों में परिवर्तन।
चुनौतियाँ
श्रवण हस्तक्षेप को सफल बनाने में कई चुनौतियाँ सामने आती हैं, जैसे:
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नवजात श्रवण जांच की सार्वभौमिकता न होने के कारण देर से पहचान।
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प्रशिक्षित विशेषज्ञों एवं आधुनिक उपकरणों की सीमित उपलब्धता।
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आर्थिक बाधाएँ, क्योंकि उपकरण एवं उपचार महँगे होते हैं।
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अभिभावकों की जागरूकता की कमी।
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बहुभाषिक वातावरण में भाषा चयन की समस्या।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, श्रवण हस्तक्षेप श्रवण बाधित व्यक्तियों के पुनर्वास और पुनर्विकास की आधारशिला है। यह न केवल श्रवण और भाषण विकास को संभव बनाता है, बल्कि सामाजिक सहभागिता और शैक्षणिक उपलब्धि को भी सुनिश्चित करता है। शीघ्र पहचान, समय पर उपकरणों का उपयोग, पारिवारिक सहभागिता और व्यक्तिगत चिकित्सा योजना – सफल हस्तक्षेप की प्रमुख शर्तें हैं। यद्यपि संसाधनों की कमी और जागरूकता की चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी तकनीकी प्रगति और समावेशी शिक्षा नीतियाँ उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करती हैं। अंततः, श्रवण हस्तक्षेप केवल सुनने की क्षमता लौटाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवाद, गरिमा और समान अवसरों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है।